अस्पताल के डॉक्टरों से जेनेरिक दवाइयाँ लिखने की माँग, महँगी ब्रांडेड दवाओं से गरीब मरीज बेहाल: नवाब

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राँची: रज़ा यूनिटी फाउंडेशन झारखंड प्रदेश अध्यक्ष नवाब ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि रांची अंजुमन इस्लामिया अस्पताल में इलाज कराने आ रहे गरीब और जरूरतमंद परिवारों ने डॉक्टरों से ब्रांडेड के बजाय जेनेरिक दवाइयाँ (Generic Medicines) पर्चे पर लिखने की गुहार लगाई है। रजा यूनिटी फाउंडेशन झारखंड प्रदेश अध्यक्ष नवाब ने कहा कि अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा महँगी ब्रांडेड कंपिनयों की दवाइयाँ लिखे जाने के कारण गरीब परिवारों को भारी आर्थिक कढ़िनाई का सामना करना पड़ रहा है।

महँगी दवाओं के बोझ से दबे गरीब परिवार
अस्पताल में इलाज कराने आए मरीजों के रिश्तेदारों ने बताया कि डॉक्टर जो दवाइयाँ लिख रहे हैं, वे निजी मेडिकल स्टोरों पर बेहद ऊंचे दामों में मिलती हैं। कई बार दवाइयों का खर्च डॉक्टर की फीस और जांच से भी कई गुना अधिक हो जाता है। एक दिहाड़ी मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए इन महँगी दवाओं का खर्च उठाना नामुमकिन साबित हो रहा है, जिसके कारण कई लोग बीच में ही इलाज छोड़ने को मजबूर हैं।

जेनेरिक दवाओं से मिलेगी बड़ी राहत
सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों की ओर से अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों से अपील है कि वे सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए केवल सॉल्ट नेम (Generic Name) ही पर्चे पर लिखें। प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र जैसी योजनाओं के तहत जेनेरिक दवाइयाँ खुले बाजार की ब्रांडेड दवाओं की तुलना में 50% से 90% तक सस्ती मिलती हैं। यदि अस्पताल के डॉक्टर जेनेरिक नाम लिखेंगे, तो मरीज इन सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं को आसानी से खरीद सकेंगे।

मुख्य माँगें

  • अनिवार्य जेनेरिक पर्चा: अंजुमन अस्पताल के सभी डॉक्टरों के लिए पर्चे पर स्पष्ट अक्षरों में जेनेरिक दवा लिखना अनिवार्य किया जाए।
  • अस्पताल परिसर में सुविधा: यदि संभव हो, तो अस्पताल परिसर के भीतर या आसपास सरकारी जनऔषधि केंद्र की तर्ज पर सस्ती दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो
  • प्रबंधन करे निगरानी: अस्पताल की प्रबंधकीय कमेटी इस बात की नियमित निगरानी करे कि किसी भी गरीब मरीज पर महँगी दवाइयों का अतिरिक्त बोझ न डाला जाए।

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