राँची में ‘झरोखा – आर्किटेक्ट मीट’ आयोजित, आधुनिक वास्तुकला और शहरी सौंदर्याकरण पर हुई विस्तृत चर्चा

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राँची : होटल ली लेक – सरोवर पोर्टिको रांची में एक दिवसीय “झरोखा आर्किटेक्ट मीट” का आयोजन किया गया, जिसमें वास्तुकला के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने आधुनिक डिज़ाइन, नए मटेरियल और शहरी विकास के विभिन्न पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सी.ओ.ए. (काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर) के अध्यक्ष आर्किटेक्ट गजानंद राम उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड खनिज संपदा से भरपूर राज्य है, जिससे यहां वास्तुकला के क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने आर्किटेक्ट्स के बीच सहयोग की भावना को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि एक वास्तुविद को दूसरे वास्तुविद की मदद करनी चाहिए और संतुलित जीवन जीते हुए बेहतर कार्य करना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन अभिलाषा और मनीषा ने किया, जबकि संयोजन गोपी कांत महतो ने संभाला। मुख्य वक्ता के रूप में आर्किटेक्ट सूर्य प्रकाश राणा (प्रिंसिपल आर्किटेक्ट, स्टूडियो स्थाल, पटना) ने अपने विचार रखे। उन्होंने वास्तुकला में एक्सपोज्ड ब्रिक और ब्रिक डोम जैसी तकनीकों के उपयोग पर विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया और अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर आईआईए झारखंड के चेयरमैन आर्किटेक्ट अतुल सरार्फ ने कहा कि वास्तुकला के विकास के लिए नए-नए मटेरियल और तकनीकों का प्रयोग जरूरी है, जिससे आधुनिक और टिकाऊ निर्माण को बढ़ावा मिल सके।कार्यक्रम में एससीएल कोरा कंपनी की चेयरपर्सन दिव्या सिंह (एमडी), समरजीत सिंह (डायरेक्टर), सौरभ सिंह (सीईओ), मुकेश वर्मा (कंट्री हेड) और अमर कुमार (आरएमएस – बिहार एवं झारखंड) भी मौजूद रहे।
पैनल चर्चा में आर्किटेक्ट कुमार अभिषेक, आर्किटेक्ट मेघा शरण, डॉ. शमा परवीन, आर्किटेक्ट नेहा सिंह और आर्किटेक्ट अनुराग कुमार (मॉडरेटर) शामिल हुए। चर्चा के दौरान राँची में सड़क चौड़ीकरण, फुटपाथ निर्माण, ड्रेनेज व्यवस्था और फ्लाईओवर के नीचे के क्षेत्रों के सौंदर्याकरण जैसे मुद्दों पर व्यावहारिक और नवाचारी सुझाव प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन आर्किटेक्ट अमित बरला ने किया। इस मौके पर वरिष्ठ आर्किटेक्ट तरुण कुमार मुखोटी, पूर्व चेयरमैन आर्किटेक्ट संदीप झा, नितेश पॉल नाग, अनुप कुमार, हर्ष राज, सौरभ टोपो, अंकित, शिखर श्रेष्ठ, प्रदीप समीर इक्का, राहुल सुरीन, रिशब चड्डा, कुमार गौरव समेत लगभग 150 आर्किटेक्ट और गणमान्य लोग उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम वास्तुकला के क्षेत्र में नवाचार, सहयोग और शहरी विकास की दिशा में एक महत्वर्णा पहल साबित हुआ।

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