रांची: झारखंड की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है। भाजपा नेता और पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही के विवादित बयान पर झारखंड मुस्लिम युवा मंच ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शाहिद अय्यूबी ने प्रेस बयान जारी कर इसे न केवल गैर-जिम्मेदाराना बताया, बल्कि सामाजिक सौहार्द के लिए खतरनाक भी करार दिया।
अय्यूबी ने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा सार्वजनिक मंच से हिंसा को बढ़ावा देना भारतीय लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान झारखंड की ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ को कमजोर करने की कोशिश हैं।
⚖️ संविधान सर्वोपरि, नफरत नहीं
मंच की ओर से जारी बयान में कहा गया कि देश डॉ. भीमराव अंबेडकर के बनाए संविधान से चलता है, न कि किसी व्यक्ति विशेष की सोच या बयानबाजी से।
अय्यूबी ने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है, और किसी भी समुदाय की धार्मिक आस्था पर सवाल उठाना असंवैधानिक है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी पत्रकार के साथ कोई घटना हुई है, तो उसके लिए कानूनी प्रक्रिया मौजूद है—पुलिस, एफआईआर और अदालतें। ऐसे मामलों में कानून को काम करने देना चाहिए, न कि भीड़ को उकसाना।
🖊️ पत्रकारों के खिलाफ बयान पर आपत्ति
प्रेस विज्ञप्ति में पत्रकारों पर अंडा, जूता या चप्पल फेंकने जैसी बातों को गंभीर और दुर्भाग्यपूर्ण बताया गया। अय्यूबी ने कहा,
“लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का इस तरह अपमान करना बेहद चिंताजनक है। जो लोग दूसरों को ‘तालिबानी’ कहते हैं, उनके अपने बयान ही हिंसक मानसिकता को उजागर करते हैं।”
🚨 प्रशासन से कार्रवाई की मांग
झारखंड मुस्लिम युवा मंच ने राज्य प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भड़काऊ भाषण देने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
मंच ने दोहराया कि देश कानून और संविधान से चलेगा, किसी भी नफरती एजेंडे से नहीं।
