‘गौस-ए-आज़म की नज़र जिस पर पड़े, बिगड़ी तकदीर संवर जाए’ से गूंजा डोरंडा
अकीदत के रंग में रंगा डोरंडा, उर्स-ए-गौसुल आज़म में उमड़े देशभर से जायरीन
रांची : डोरंडा के फिरदौस नगर, मनिटोला स्थित खानकाह मजहरिया मुनअमिया में ग्यारहवीं शरीफ के अवसर पर हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी दो दिवसीय उर्स-ए-गौसुल आज़म का आगाज़ अकीदत और रूहानी माहौल के बीच हुआ। उर्स का आयोजन खानकाह के सज्जादानशीन अल्हाज सैय्यद शाह अल्कमा शिब्ली कादरी की जानिब से किया गया है। उर्स में झारखंड के विभिन्न जिलों के साथ-साथ देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में अकीदतमंद और जायरीन पहुंचे। उर्स के दौरान कुरआन खानी, परचम कुशाई, फातिहाखानी, हल्का-ए-जिक्र, मिलाद शरीफ, जलसा-ए-गौसुल आज़म, महफिल-ए-समा और सूफियाना कव्वाली समेत कई धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। जायरीनों की सुविधा के लिए लंगर-ए-गौसिया की भी विशेष व्यवस्था की गई है।
कव्वाली ने बांधा समां
उर्स के पहले दिन नमाज-ए-फजर के बाद कुरआन खानी और परचम कुशाई के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। शाम सात बजे फातिहाखानी एवं हल्का-ए-जिक्र का आयोजन किया गया। इसके बाद रात आठ से दस बजे तक महफिल-ए-समा सजी। पटना की खानकाह से पहुंचे मशहूर कव्वाल अनीस खां एवं उनकी टीम ने सूफियाना कलाम पेश कर महफिल में रूहानी रंग भर दिया। कव्वाली के दौरान गौस-ए-आज़म की शान में पेश किए गए कलाम पर अकीदतमंद झूम उठे। पूरी महफिल देर रात तक सूफियाना माहौल में डूबी रही।
महफिल में पेश किए गए कलाम-
“मैं हूं गौस का दीवाना, मुझे कोई ग़म नहीं, गौस-ए-आज़म की नज़र जिस पर पड़ जाए, बिगड़ी हुई तक़दीर भी संवर जाए।” ने अकीदतमंदों को भावविभोर कर दिया। इसके बाद रात दस बजे जायरीनों के बीच लंगर-ए-गौसिया तकसीम किया गया।
आज होंगे कई धार्मिक कार्यक्रम
उर्स के दूसरे दिन सुबह दस बजे से मिलाद शरीफ एवं जलसा-ए-गौसुल आज़म का आयोजन होगा। इसमें शहर के कई दानिश्वर एवं आलिम-ए-दीन तकरीर करेंगे। दोपहर 12 बजे से फातिहाखानी एवं महफिल-ए-समा होगी। इसके बाद दोपहर दो बजे जायरीनों के बीच लंगर तकसीम किया जाएगा।वहीं रात आठ से दस बजे तक आखिरी कुल, सूफियाना कव्वाली और लंगर वितरण के साथ दो दिवसीय उर्स-ए-गौसुल आज़म का समापन होगा। उर्स में सैय्यद अय्याजुर रब अर्शी, मौलाना सैय्यद अबू राफे तिबरानी, सैय्यद हेजाजी कादरी, सैय्यद हम्मादी कादरी, सैय्यद जैन कादरी, मो. कमरू जमा कादरी, मो. शब्बीर, मो. हसन कादरी, मो. अकीलुर रहमान, डॉ. हलीमुद्दीन, परवेज हसन, इम्तियाज खान, नदीम खान, मो. शाहनवाज, शाहिद खान, रिजवान हुसैन, मो. सद्दाम, मो. रकीब समेत सैकड़ों अकीदतमंद एवं जायरीन मौजूद रहे।
