मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा नया आयाम, रिनपास में 4 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण संपन्न

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रांची : रिनपास, कांके, रांची के मनोचिकित्सीय सामाजिक कार्य विभाग द्वारा टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (TISS), मुंबई के सेंटर फॉर हेल्थ एंड मेंटल हेल्थ, स्कूल ऑफ सोशल वर्क के सहयोग से आयोजित चार दिवसीय “क्वीयर ट्रांस-अफर्मेटिव मानसिक स्वास्थ्य देखभाल” प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज जे. ई. धुंजीभॉय अकादमिक एवं अनुसंधान केंद्र, रिनपास में सफलतापूर्वक समापन हुआ।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के चौथे एवं अंतिम दिन का मुख्य उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को क्वीयर एवं ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए वैज्ञानिक, संवेदनशील एवं अधिकार-आधारित मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विभिन्न चिकित्सीय दृष्टिकोणों से परिचित कराना था।bदिन का प्रथम तकनीकी सत्र “क्वीयर अफर्मेटिव कॉग्निटिव बिहेवियर थेरेपी (CBT)” पर आयोजित किया गया, जिसे सुश्री जागृति वांद्रेकर ने संबोधित किया। उन्होंने बताया कि संज्ञानात्मक व्यवहार चिकित्सा (CBT) को क्वीयर एवं ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के जीवनानुभवों एवं सामाजिक चुनौतियों के अनुरूप किस प्रकार अनुकूलित किया जा सकता है, जिससे उनमें आत्मविश्वास, आत्मस्वीकृति एवं मानसिक सुदृढ़ता का विकास हो सके।
द्वितीय सत्र “क्वीयर अफर्मेटिव नैरेटिव थेरेपी” पर श्राबस्ती मजूमदार द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने नैरेटिव थेरेपी की अवधारणा को विस्तार से समझाते हुए बताया कि किस प्रकार व्यक्ति अपने जीवन की सकारात्मक कहानियों को पुनर्परिभाषित कर सामाजिक पूर्वाग्रहों एवं भेदभाव से ऊपर उठकर अपनी पहचान एवं गरिमा को सशक्त बना सकता है।
दोपहर के सत्र में कविता अरोड़ा ने “बच्चों में जेंडर नॉन-कन्फॉर्मिटी के साथ कार्य” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने जेंडर विविधता वाले बच्चों की मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं, परिवार एवं विद्यालय की सहयोगात्मक भूमिका तथा संवेदनशील एवं समावेशी वातावरण उपलब्ध कराने के महत्व पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों के समग्र विकास के लिए सामाजिक स्वीकृति, सम्मान एवं उचित परामर्श अत्यंत आवश्यक है। कार्यक्रम के समापन सत्र में टीआईएसएस की शोध समन्वयक निकिता एवं ज़ेब द्वारा प्रतिभागियों का पोस्ट असेसमेंट आयोजित किया गया। इस मूल्यांकन के माध्यम से प्रशिक्षण के दौरान अर्जित ज्ञान एवं कौशल का आकलन किया गया। परिणामों से प्रतिभागियों की समझ एवं क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि परिलक्षित हुई। चार दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में मनोचिकित्सकों, क्लिनिकल मनोवैज्ञानिकों, मनोचिकित्सीय सामाजिक कार्यकर्ताओं, नर्सिंग अधिकारियों, शोधार्थियों तथा विभिन्न संस्थानों से आए मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों ने सक्रिय सहभागिता की। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान, संवादात्मक चर्चाएँ, केस आधारित शिक्षण एवं व्यावहारिक अनुभवों के माध्यम से प्रतिभागियों को समावेशी, वैज्ञानिक एवं अधिकार-आधारित मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विभिन्न आयामों से अवगत कराया गया।समापन अवसर पर रिनपास की निदेशक डॉ. जयति सिमलाई ने इस चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी संसाधन व्यक्तियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से डॉ. के.पी. एवं उनकी पूरी टीम तथा मनोचिकित्सीय सामाजिक कार्य विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. मनीषा किरण के नेतृत्व एवं समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अत्यंत विचारोत्तेजक (Thought-Provoking), ज्ञानवर्धक एवं प्रशिक्षकों के लिए अत्यंत उपयोगी रहा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम मानसिक स्वास्थ्य पेशेवरों की संवेदनशीलता एवं क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डॉ. सिमलाई ने टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (TISS), मुंबई के साथ भविष्य में भी ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों, अनुसंधान एवं शैक्षणिक गतिविधियों में निरंतर सहयोग की आशा व्यक्त की। साथ ही उन्होंने देश के अन्य प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं स्वास्थ्य संस्थानों के साथ भी इसी प्रकार के सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक समावेशी, सुदृढ़ एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

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