रांची: मांडर मुड़मा स्थिति ऐतिहासिक पाड़हा जतरा भूमि की बंदोबस्ती और विवाद को लेकर राजी पाड़हा सरना प्रार्थना सभा द्वारा आज दिनांक 14 अक्टूबर 2026 को प्रेस क्लब रांची में संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया, केन्द्रीय प्रवक्ता संजय पाहन ने कहा कि पाड़हा जतरा आदिकाल से छोटानागपुर के मूल आदिवासी ( उरांव, मुंडा ) के समागम का ऐतिहासिक धरोहर है जो पाड़हा पारंपरिक स्वाशासन व्यवस्था का प्रमुख केंद्र एवं परंपरागत व्यवस्था के तहत यह स्थल सर्वोच्च न्यायालय का परिचायक भी है।
पाड़हा जतरा का आयोजन लगभग 65 एकड़ भूमि पर कालांतर से होती रहा है भूमि के सीमांकन और भूमि अधिग्रहण एवं बंदोबस्ती को लेकर समय-समय पर झारखंड सरकार को लिखित आवेदन दिया गया, इसके अधार पर अंचल अधिकारी द्वारा वर्ष 2014, 2015, 2018 में जांच प्रतिवेदन दिया गया, उसके बावजूद रांची जिला प्रशासन के स्तर पर भूमि अधिग्रहण एवं भूमि बंदोबस्त का मामला लम्बित है, जिसके कारण समय-समय पर रैयतों द्वारा मकान बनाने को लेकर विवाद उत्पन्न और मनगढ़ंत आरोप लगाकर केस-मुकदमा किया जाता है, उन्होनें कहा कि बिरसा उरांव से राजी धर्म गुरू बंधन तिग्गा एवं राजी पाड़हा प्रार्थन सभा भारत के किसी भी पदाधिकारी का कोई भी मतभेद और लडा़ई नही है बल्कि उनसे बार-बार उनके भूमि जिसका खाता नम्बर 101 प्लाट नम्बर 349 रकबा भूमि जतरा के लिए बिक्री करने या उसके स्थान पर किसी अन्य जगहा लेना का अनुरोध किया गया ताकि आदिवासी समुदाय के धार्मिक संस्कृतिक विरासत पाड़हा जतरा मुड़मा बची रहे, लेकिन वो हमेशा टाल-मटोल करते रहे और धर्मगुरू बंधन तिर्की एवं अन्य पर मनगढ़ंत आरोप लगाकर केस मुकदमे करते रहे।
यही नही स्थानी ग्राम सभा के द्वारा जतरा स्थल के भूमि पर किसी भी प्रकार के स्थाई निर्माण पर रोक लगा दिया गया था उसके बावजूद उक्त भूमि पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया जो लोगों की भावना के खिलाफ था।
बिरसा उरांव द्वारा हाईकोर्ट में किए गए कंटेमेंट केस पर न्यायालय द्वारा को डिसिजन नही दिया गया बल्कि ड्राप कर दिया गया है।
उन्होने झारखंड सरकार से मांग किया कि 2018 से भूमि अधिग्रहण और भूमि बंदोबस्ती करने का मामला जो रांची उपायुक्त और अपर समाहर्ता के पास लम्बित है जिसे जल्द आंवटन कराया जाए।
इस मौके पर आदिवासी छात्र संघ के केन्द्रीय अध्यक्ष सुशील उरांव, गंगू पाहन, दिनेश मुंडा, ब्बलू मुंडा, रंजीत उरांव, क्रातिक उरांव सहित अन्य शामिल थे।
