झारखण्ड जैव विविधता पर्षद बौद्धिक सम्पदा अधिकार एवं जैव विविधता शासनपर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

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रांची : झारखंड जैव विविधता पर्षद (JBB) द्वारा कांके रोड स्थित होटल कोर्टयार्ड बाय मैरियट में “बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) एवं जैव विविधता शासन “ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न वन प्रमंडलों के पदाधिकारी, वैज्ञानिक, शिक्षक, शोधकर्ता, प्रशासनिक अधिकारी तथा जैव विविधता प्रबंधन समिति के सदस्य बड़ी संख्या में शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत स्कूली बच्चों के स्वागत गीत से हुई। इसके बाद पर्षद के अध्यक्ष विश्वनाथ शाह, आईएफएस ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि वर्तमान समय में जैव संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान की सुरक्षा के लिए IPR की समझ अत्यंत आवश्यक है तथा समाज के सभी वर्गों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर साझा संरक्षण और लाभ-वितरण की दिशा में कार्य करना चाहिए। मंच संचालन सदस्य सचिव पी. आर. नायडू, आईएफएस ने किया।
मुख्य अतिथि संजीव कुमार, आईएफएस, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं HoFF, झारखंड ने जैव विविधता अधिनियम, 2002 के संदर्भ में जैव विविधता संरक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य के जैव विविधता धरोहर स्थलों, विशेषकर हजारीबाग स्थित कैनरी हिल, के संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि IPR व्यवस्था पारंपरिक ज्ञान को जैव संसाधनों के अवैध दुरुपयोग से बचाने और स्थानीय लोगों को अधिकार दिलाने का प्रभावी माध्यम है।मुख्य वक्ता प्रो. (डॉ.) जी. बी. रेड्डी, कुलपति, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ एडवांस्ड लीगल स्टडीज, कोच्चि ने जैव संसाधनों की कानूनी सुरक्षा और विधिक संस्थाओं के समन्वय पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर “झारखंड में सामुदायिक बीज बैंक की स्थापना एवं प्रबंधन मार्गदर्शिका” पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया।तकनीकी सत्रों में प्रो. रेड्डी ने पौध प्रजाति एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2001 की जानकारी दी। प्रो. (डॉ.) एन. एस. श्रीनिवासुलु ने जैव विविधता शासन की संस्थागत व्यवस्था पर चर्चा की, जबकि प्रो. (डॉ.) श्यामला कंददाई ने जैव विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों और क्रियान्वयन की चुनौतियों को स्पष्ट किया। प्रो. (डॉ.) एम. आर. श्रीनिवास मूर्ति ने जैव संसाधनों के व्यावसायीकरण एवं लाभ साझा करने की प्रक्रिया पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का समापन संवाद, वैलिडिक्टरी सत्र और धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। अधिकारियों ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य राज्य में जैव विविधता संरक्षण एवं कानूनी जागरूकता को मजबूत करना है।कार्यक्रम के सफल आयोजन में पर्षद के अधिकारी व कर्मियों हरि शंकर लाल, मनीष कुमार, सुनील कुमार, धीरेंद्र कुमार, मोनी कुमारी, अमरनाथ जय कुमार – NBA इंटर्न तथा अन्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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