रांची: झारखंड में गजराज को नियंत्रित करने के लिए अब हाइटेक व्यवस्था की तैयारी की जा रही है. इसके तहत वन विभाग द्वारा बेहोश करने वाली बंदूक (ट्रैंक्यूलाइजिंग गन) खरीदी जाएगी, जो आरडी 706 रिमोट इंजेक्शन सिस्टम से लैस होगी. इसके लिए वनकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे सटीक निशाना साध सकें. हाथी को बेहोश करने के बाद उसके गले में 3.5 मीटर लंबा जीपीएस युक्त पट्टा पहनाया जाएगा, जिससे उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके.
ऐसे काम करेगी पूरी हाइटेक व्यवस्था
इस सिस्टम में जीपीएस ग्लोनैस रिसीवर, वीएचएफ रिसीवर, यागी एंटीना, हैंडहेल्ड टर्मिनल और अन्य आधुनिक डिवाइस शामिल होंगे. जीपीएस एंटीना के जरिए तेज और सटीक लोकेशन ट्रैकिंग संभव होगी, जिसमें समय, तारीख, अक्षांश, देशांतर और ऊंचाई की जानकारी मिलेगी. डेटा ट्रांसफर लाइव और प्रभावी होगा, जबकि सैटेलाइट और ब्लूटूथ के माध्यम से डेटा डाउनलोड किया जा सकेगा.
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हाथियों पर नजर रखने की हाइटेक तैयारी: ट्रैंक्यूलाइजिंग गन से बेहोश कर पहनाया जाएगा GPS कॉलर
रांची: झारखंड में गजराज को नियंत्रित करने के लिए अब हाइटेक व्यवस्था की तैयारी की जा रही है. इसके तहत वन विभाग…
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March 29, 2026
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रांची: झारखंड में गजराज को नियंत्रित करने के लिए अब हाइटेक व्यवस्था की तैयारी की जा रही है. इसके तहत वन विभाग द्वारा बेहोश करने वाली बंदूक (ट्रैंक्यूलाइजिंग गन) खरीदी जाएगी, जो आरडी 706 रिमोट इंजेक्शन सिस्टम से लैस होगी. इसके लिए वनकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे सटीक निशाना साध सकें. हाथी को बेहोश करने के बाद उसके गले में 3.5 मीटर लंबा जीपीएस युक्त पट्टा पहनाया जाएगा, जिससे उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सके.
ऐसे काम करेगी पूरी हाइटेक व्यवस्था
इस सिस्टम में जीपीएस ग्लोनैस रिसीवर, वीएचएफ रिसीवर, यागी एंटीना, हैंडहेल्ड टर्मिनल और अन्य आधुनिक डिवाइस शामिल होंगे. जीपीएस एंटीना के जरिए तेज और सटीक लोकेशन ट्रैकिंग संभव होगी, जिसमें समय, तारीख, अक्षांश, देशांतर और ऊंचाई की जानकारी मिलेगी. डेटा ट्रांसफर लाइव और प्रभावी होगा, जबकि सैटेलाइट और ब्लूटूथ के माध्यम से डेटा डाउनलोड किया जा सकेगा.
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सेंसर और ट्रैकिंग से मिलेगी सटीक जानकारी
इस डिवाइस में 3-एक्सिस मैग्नेटोमीटर, 3-एक्सिस एक्सेलेरोमीटर और तापमान सेंसर लगे होंगे, जो हाथी की गतिविधियों की विस्तृत जानकारी देंगे. 24×7 रीयल-टाइम ट्रैकिंग वेब और मोबाइल ऐप के जरिए संभव होगी. साथ ही जियोफेंसिंग और वीएचएफ बीकन सिस्टम भी इसमें अनिवार्य रूप से शामिल रहेगा.
सुरक्षित और टिकाऊ होगी पूरी प्रणाली
जीपीएस कॉलर का वजन 10 किलोग्राम से अधिक नहीं होगा और यह यूवी व जलरोधी बेल्ट के साथ आएगा. इसमें 10 डी लिथियम सेल बैटरी होगी, जिसे दूर से भी शेड्यूल किया जा सकेगा. ड्रॉप-ऑफ सिस्टम के तहत तय समय, बैटरी कम होने या जरूरत पड़ने पर कॉलर अपने आप हट सकेगा.
इस हाइटेक पहल से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और वन्यजीव प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
