‘हैक टू द फ्यूचर’: झारखंड के युवाओं ने दिखाई इनोवेशन और स्किल की ताकत

Spread the love

रामगढ़, दुमका और देवघर के छात्रों और शिक्षकों ने लोगों की दैनिक समस्याओं का दिया समाधान, किया डिज़ाइन थिंकिंग और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल, दिखी उनकी रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और समस्या-समाधान क्षमता

रांची, झारखंड,, मार्च, 2026: क्वेस्ट एलायंस ने झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (जेईपीसी) के सहयोग से रांची में राज्य-स्तरीय कार्यक्रम ‘हैक टू द फ्यूचर’ का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में छात्र, शिक्षक, सरकारी अधिकारी और आम नागरिकों ने हिस्सा लिया। इस दौरान, शिक्षा के क्षेत्र में इनोवेशन और भविष्य की तैयारियों पर चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में लगभग 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें 35 विद्यार्थी, 12 शिक्षक, 30 एनजीओ प्रतिनिधि, सरकारी अधिकारी तथा अन्य हितधारक शामिल थे। प्रतिभागी रामगढ़, दुमका और देवघर जिलों से आए थे, जिन्होंने शिक्षा में नवाचार, भविष्य की तैयारी और प्रणालीगत परिवर्तन पर विचार-विमर्श किया।
इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण छात्रों द्वारा बनाए गए प्रोटोटाइप की लाइव प्रदर्शनी थी। इसमें छात्रों ने अपने आइडिया पेश किए और हितधारक समूह से सीधी बातचीत की।
इन प्रोटोटाइप में ‘स्मार्ट एग्रीकल्चर रिकमेंडेशन सिस्टम’ और ‘स्मार्ट ड्रिप इरिगेशन सिस्टम’ जैसे समाधान भी थे। इससे किसानों को फसल से जुड़े फैसले लेने और पानी का सही इस्तेमाल करने में मदद मिलती है। ऐसे ही एक समाधान- ‘वॉटर बॉडी क्लीनिंग रोबोट’ ने स्थानीय प्रदूषण की समस्या से निपटने का काम किया। स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए किशोरियों के लिए एक ‘एआई-आधारित हेल्थ मॉनिटरिंग बॉक्स’ और जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए एक ‘वाइल्ड वाच डिफेंस सिस्टम’ भी पेश किया गया।
कार्यक्रम में बोलते हुए, क्वेस्ट एलायंस की स्कूल प्रोग्राम डायरेक्टर नेहा पार्टी ने भारत के 2047 के विज़न पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने एक ऐसी दुनिया के बारे में बात की, जो ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण तेज़ी से बदल रही है। उन्होंने कहा, “भले टेक्नोलॉजी से यह उम्मीद की जाती है कि वह निर्देश-आधारित कामों को करेगी, लेकिन तब भी आदमी की रचनात्मकता, निर्णय लेने की क्षमता और विवेक हमेशा महत्वपूर्ण बने रहेंगे।”
कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी जबरदस्त रही। उनके विचारों ने कार्यक्रम को एक नई दृष्टि दी। इंटरैक्टिव सेशन के दौरान, एक छात्र ने कहा, “मैं समझता हूँ कि रोबोट छोटे-मोटे काम करेंगे, लेकिन हमें भी रोबोट के साथ मिल कर काम करते रहना होगा।” यह बात काम की बदलती प्रकृति को लेकर छात्रों के मन में मौजूद आशंका और जिज्ञासा, दोनों को दर्शाती है। चर्चा में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि युवाओं को आलोचनात्मक सोच, रचनात्मक समस्या-समाधान, सिस्टम थिंकिंग और टेक्नोलॉजी का जिम्मेवारी से इस्तेमाल जैसे कौशलों से लैस करना कितना ज़रूरी है।
शिक्षा से संबंधित तकनीक और एआई की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों ने माना कि शिक्षक अब तेज़ी से डिजिटल साक्षरता को बढ़ा रहे हैं और इस काम में एआई टूल्स का इस्तेमाल हो रहा है। बहरहाल, एआई छात्रों को समस्या-समाधान में सहायता कर रहा है और उनके सीखने की गति बढ़ा रहा है। फिर भी, यह इंसानी दिमाग की जगह लेने के बजाए सहायक के रूप में इसके नैतिक उपयोग पर बल देगा।

झारखंड के स्टेट प्रोग्राम ऑफिसर (एसपीओ) डॉ. अविनव कुमार इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “कक्षा 12 में केवल 11.92 प्रतिशत छात्र विज्ञान चुनते हैं, जो एसटीईईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) में छात्रों की भागीदारी को मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित करता है।” उन्होंने प्रौद्योगिकी एकीकरण के लिए शिक्षकों की तैयारी को मजबूत करने पर जोर दिया और बताया कि तकनीकी कौशल के साथ-साथ सहयोग, संचार और लचीलापन जैसी सामाजिक-भावनात्मक क्षमताएँ भविष्य के लिए आवश्यक हैं।
झारखंड में क्वेस्ट एलायंस के कामों से मिले इनसाइट्स ने चुनौतियों और प्रभाव, दोनों को सामने लाने का काम किया। यूथ क्लब्स की भागीदारी ने महत्वपूर्ण परिणाम दिए हैं, विशेष रूप से किशोरियों को सशक्त बनाने की दिशा में। किशोरियों को उनके करियर, शिक्षा आदि के लिए मार्गदर्शन मिला है।
इस कार्यक्रम ने सरकार, स्कूलों और समुदायों के बीच साझेदारी को मजबूत करने के महत्व को रेखांकित किया। इसमें शिक्षकों द्वारा व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए छात्रों को समर्थन देने की जरूरत समझी गई, ताकि भविष्य के लिए कौशल से लैस युवाओं को तैयार किया जा सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *