दोमुहानी टुसू मेला में ढोल-नगाड़े की धुन पर झूमे लोग

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मंत्री दीपक बिरुवा, विधायक सोमेश सोरेन, सांसद विद्युत वरण महतो, विधायक सरयू राय, कुणाल सारंगी, झारखण्ड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान, राजू गिरी हुए शामिल।

जमशेदपुर: दोमुहानी टुसू मेला, जो जमशेदपुर में सुवर्णरेखा और खरकई नदियों के संगम पर लगता है, झारखंड का एक प्रमुख फसल और सांस्कृतिक उत्सव है जहाँ लोग पारंपरिक टुसू प्रतिमा, चौड़ल (सजाए गए ढांचे) लेकर आते हैं, ढोल-मांदर की थाप पर नृत्य करते हैं, और देवी टुसू की पूजा करते हैं, यह मेला आदिवासी और कुड़मी समुदायों के लिए महत्वपूर्ण है और 14 जनवरी (मकर संक्रांति) के आसपास बड़े उत्साह से मनाया जाता है, जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रतियोगिताएँ होती हैं. इस मेले का आयोजन लंबे समय से झामुमो के वरिष्ठ नेता मोहन कर्मकार द्वारा आयोजित किया जा रहा है। यह एक फसल उत्सव है जो कृषि समाज की समृद्धि और सामुदायिक भावना का प्रतीक है, खासकर आदिवासी और कुड़मी समुदायों के लिए।दोमुहानी टुसू मेला में रंगीन कागज से सजे बड़े-बड़े चौड़ल का जुलूस, टुसू देवी की पूजा और विसर्जन,पारंपरिक लोक गीत (टुसू गीत) और नृत्य,ढोल-मांदर की थाप पर लोक संस्कृति का प्रदर्शन एवं बेहतर टुसू प्रतिमा और चौड़ल के लिए प्रतियोगिताएँ हुई।
इस अवसर पर झारखण्ड सरकार के मंत्री दीपक बिरुवा, विधायक सोमेश सोरेन, सांसद विद्युत वरण महतो, विधायक सरयू राय, कुणाल सारंगी, झारखण्ड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान, राजू गिरी शामिल हुए। इस अवसर पर झारखण्ड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान ने मेले में शामिल लोगों को बधाई दी एवं परंपरागत ढोल नगाड़े भी बजाए।

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