रांची। राजधानी रांची के प्रेस क्लब में शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को विभिन्न आदिवासी संगठनों ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर आगामी 30 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में चर्च की ओर से आयोजित बताई जा रही ‘आदिवासी एकता महारैली’ का विरोध किया।
प्रेस वार्ता में संगठनों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि जब-जब ईसाई मिशनरी से जुड़े मुद्दों पर संकट की स्थिति बनती है, तब-तब आदिवासी एकता के नाम पर लोगों को एकजुट करने का प्रयास किया जाता है। संगठनों ने कहा कि आदिवासी समाज के सामाजिक और धार्मिक पूजा स्थलों तथा परंपराओं के संरक्षण को लेकर उनकी अपनी पहचान और अधिकार सर्वोपरि हैं।
आदिवासी संगठनों ने धर्मांतरण, डीलिस्टिंग, आरक्षण और आदिवासी अधिकारों को प्रमुख मुद्दा बताते हुए कहा कि उनका मुख्य संघर्ष आदिवासी समाज के अस्तित्व, अस्मिता, हक और अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने धर्मांतरित ईसाइयों को आदिवासी आरक्षण एवं अन्य सुविधाएं दिए जाने के मुद्दे पर भी आपत्ति जताई और डीलिस्टिंग की मांग दोहराई।
संगठनों ने परिसीमन, विदेशी फंडिंग और एफसीआरए जैसे मुद्दों को लेकर भी चर्च की भूमिका पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि आदिवासी समाज से जुड़े मामलों में चर्च का नेतृत्व या हस्तक्षेप उन्हें स्वीकार नहीं है।
प्रेस वार्ता में यह भी आरोप लगाया गया कि 15 अगस्त 2026 को बिशप हाउस, पुरुलिया रोड से चर्च के सभी पल्ली पुरोहितों को पत्र जारी कर बड़ी संख्या में ईसाई समुदाय के लोगों से प्रस्तावित महारैली में शामिल होने की अपील की गई। संगठनों ने इसी आधार पर रैली को ‘चर्च प्रायोजित रैली’ बताया।
हालांकि, ये सभी आरोप प्रेस वार्ता में मौजूद आदिवासी संगठनों की ओर से लगाए गए हैं। रैली के आयोजकों या चर्च पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आने पर खबर में उसे भी शामिल किया जा सकता है।
प्रेस वार्ता में केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा, मुख्य पहान जगलाल पहान, प्रधान महासचिव अशोक मुंडा, अमर मुंडा, जनजाति सुरक्षा मंच के संयोजक संदीप उरांव, हिंदुवा उरांव, जगन्नाथ भगत, सोमा उरांव, झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति के अध्यक्ष मेघा उरांव समेत विभिन्न संगठनों के कई प्रतिनिधि मौजूद रहे।
